आपदा प्रबंधन को लेकर कार्यशाला का आयोजन

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परवेश शर्मा। परागपुर

पृथ्वी के हिलने की स्थिति को भूकम्प कहते हैं। इस परिस्थिति में सावधानी बरतने से भूकम्प से होने वाली क्षति को हम कम कर सकते हैं। यह बात आपदा प्रबंधन को लेकर आयोजित कार्यशाला में प्रिंसिपल अनिरुद्ध शर्मा ने कही। आपदा प्रबन्धन समिति द्वारा आयोजित रावमापा गरली बाल में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर अनिरुद्ध शर्मा ने कहा कि धरती इनर कोट, टेक्टोनिक प्लेटस व आउटर कोट से बनती है।यह टेक्टोनिक प्लेट्स खिसकती रहती हैं और यह प्लेटस जब परस्पर टकराती हैं, तो पृथ्वी हिलती है, इसी को भूकम्प कहते हैं।

उन्होंने कहा कि गत एक शताब्दी में देश भर में 7 बहुत व्यापक स्तर भूकंप आए हैं। उन्होंने बताया कि 1936 के भूकंप में 3 लाख लोग मारे गए थे। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन के को-आर्डिनेटर फतेह सिंह भाटिया ने बताया कि ऐसी परिस्थिति में खुले मैदान में शरण लेनी चाहिए। आपदा के प्रशिक्षक सुशील कुमार ने रेस्क्यू संबंधी प्रशिक्षण दिया।तो हेड अकाउंट कमेटी के प्रभारी रमेश सोनी ने आपदा फंसे बच्चों की गणना की।

इस अवसर पर 16 कमरों में विपिन कुमार की अलार्मिंग कमेटी ने शुरुआत की व दीपक धीमान की टीम ने बचाव दल का काम किया, तो मंजू सहोत्रा की प्राथमिक चिकित्सा टीम ने 22 बच्चों को चिकित्सा दी व रविकांत की टीम ने पूरी बचाव गतिविधियां का संचालन किया। इस अवसर पर आश्रित बच्चों की फल बिस्किट वितरित किए।

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